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“आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः” (ऋग्वेद – 1.89.1)
“Let noble thoughts come to us from all directions”
Highlights | इस लेख में…..
इस श्रृंखला में…
- नवदुर्गा कौन हैं — नौ अलग देवियाँ या एक ही महामाया के नौ स्वरूप?
- शैलपुत्री से सिद्धिदात्री तक नवदुर्गा का शास्त्रीय क्रम
- प्रत्येक देवी के प्राकट्य की कथा और उसका ग्रंथ-आधार
- हर स्वरूप के नाम का अर्थ और उस नाम के पीछे का प्रसंग
- देवी के स्वरूप, आयुध, वाहन और विशेष लक्षणों का शास्त्रीय उल्लेख
- सती, पार्वती, काली, गौरी, दुर्गा और महामाया जैसे नामों का आपसी संबंध
- प्रत्येक स्वरूप से जुड़े प्रमुख देवकार्य और पुराणिक प्रसंग
- लोकप्रिय मान्यताओं और वास्तविक शास्त्रीय प्रमाण के बीच अंतर
- जहाँ उपलब्ध हों, मूल संस्कृत श्लोक — स्रोत और श्लोक-संख्या सहित
- नवदुर्गा के नौ रूपों को एक सतत कथा और साधना-क्रम के रूप में समझने का प्रयास
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