सनातन ज्ञान

प्राचीन ज्ञान। शाश्वत प्रासंगिकता ।

माँ कात्यायनी का दिव्य बहुभुजा स्वरूप, सिंहवाहन और चरणों के नीचे महिषासुर। पृष्ठभूमि में भगवान शिव, महर्षि कात्यायन तथा माँ उग्रचण्डा, भद्रकाली और कात्यायनी के तीन स्वरूप दर्शाए गए हैं।
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नवरात्रि विशेष – 6

महिषासुर का तीन सृष्टियों में जन्म और तीन बार संहार क्यों हुआ? भगवान शिव का अंश होने के बावजूद उसे देवी के हाथों मृत्यु क्यों मिली? और अंततः माँ कात्यायनी ने उसे अपने चरणों में स्थान क्यों दिया? जानिए कालिकापुराण, वामनपुराण और स्कन्दपुराण के शास्त्रीय प्रमाणों के साथ।

चार भुजाओं वाली माँ स्कन्दमाता की गोद में छह मुखों वाले भगवान कार्तिकेय, दोनों हाथों में कमल, आशीर्वाद मुद्रा और समीप विराजमान सिंह।
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नवरात्रि विशेष – 5

माँ स्कन्दमाता केवल भगवान कार्तिकेय की जननी ही नहीं, बल्कि उन्हें दिव्य अनुग्रह और ज्ञान प्रदान करने वाली परमेश्वरी भी हैं। शिवपुराण, स्कन्दपुराण, देवीभागवत और तमिल कन्दपुराणम् के प्रमाणों से जानिए भगवती के पाँचवें स्वरूप की महिमा।

सिंह पर विराजमान माँ चन्द्रघंटा का दिव्य दशभुजा स्वरूप, मस्तक पर अर्धचन्द्र, हाथों में विभिन्न आयुध, लाल वस्त्र और स्वर्ण मुकुट। पृष्ठभूमि में हिमालय तथा नवरात्रि विशेष का शीर्षक।
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नवरात्रि विशेष – 3

नवदुर्गा के तीसरे स्वरूप माँ चंद्रघंटा का प्राकट्य किन परिस्थितियों में हुआ? शिव-विवाह की बारात और जतुकासुर-वध से जुड़ी दो प्रचलित कथाओं के साथ जानिए भगवती का दशभुजा स्वरूप, मस्तक पर अर्धचंद्र, घंटानाद का महत्त्व तथा देवीकवच और दुर्गा सप्तशती में उपलब्ध शास्त्रीय प्रमाण।

सिंह पर विराजमान अष्टभुजाधारी माँ कूष्माण्डा, आठ हाथों में कमण्डलु, धनुष, बाण, कमल, सुधाकलश, चक्र, गदा और जपमाला धारण किए हुए। पीछे सूर्य का दिव्य तेज तथा ब्रह्माण्ड, ग्रह और आकाशगंगाएँ दिखाई दे रही हैं।
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नवरात्रि विशेष -4

जिस भगवती ने शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी और चन्द्रघण्टा के रूप में दर्शन दिए, वही माँ कूष्माण्डा सम्पूर्ण सृष्टि की जननी हैं। कालिकापुराण, देवीभागवत और दुर्गासप्तशती के आधार पर जानिए माँ का जगज्जननी स्वरूप, सूर्य से संबंध, अष्टभुजा रूप और पौराणिक प्रसंग।

हिमालय की पृष्ठभूमि में अक्षमाला और कमण्डलु धारण किए माँ ब्रह्मचारिणी का तपस्विनी स्वरूप
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नवरात्रि विशेष -2

नवदुर्गा का दूसरा स्वरूप माँ ब्रह्मचारिणी वास्तव में पार्वती का तपस्विनी स्वरूप है। शिवमहापुराण, स्कन्दपुराण और देवीपुराण के आधार पर जानिए उनकी कठोर तपस्या, अपर्णा और उमा नाम की कथा, सप्तर्षियों द्वारा ली गई परीक्षा और अंततः शिव-प्राप्ति का पूरा प्रसंग।

नवरात्रि विशेष में माँ शैलपुत्री का दिव्य स्वरूप, वृषभ पर आरूढ़, हाथों में त्रिशूल और कमल तथा अभय और वरद मुद्रा के साथ।
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नवरात्रि विशेष – 1

नवरात्रि की प्रथम देवी माँ शैलपुत्री कौन हैं? शास्त्रों के अनुसार वही महामाया पूर्व में सती, फिर योगनिद्रा से जुड़ी शक्ति और अंततः हिमालय-पुत्री पार्वती के रूप में प्रकट होती हैं। जानिए उनके प्राकट्य, नाम, स्वरूप और देवकार्य का शास्त्रीय आधार।

भगवान गणेश के प्राकट्य की अनेक शास्त्रीय कथाएँ – श्री गणेश दर्शन प्राकट्य मीमांसा
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श्री गणेश दर्शन

क्या भगवान गणेश के प्राकट्य की केवल वही एक कथा है जिसे हम बचपन से सुनते आए हैं? शास्त्रों की पड़ताल एक अलग संसार खोलती है। जानिए विभिन्न पुराणों और परम्पराओं में वर्णित गणेश प्राकट्य की अनेक कथाएँ।

रक्षाबंधन की विभिन्न कथाओं को दर्शाता चित्र – इन्द्र-शची, वामन-बलि, लक्ष्मी-बलि और आधुनिक भाई-बहन।
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रक्षाबंधन — जिसकी कहानी भाई-बहन से शुरू नहीं होती !

क्या रक्षाबंधन हमेशा से केवल भाई-बहन का त्योहार था? इन्द्र-शची, राजा बलि, माता लक्ष्मी और प्राचीन रक्षा-सूत्र की परंपराओं के माध्यम से जानिए इस पर्व की रोचक और कम चर्चित कहानी।

दुर्योधन की मनोदशा और कुरुक्षेत्र की युद्धभूमि
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दुर्योधन की मनोदशा

कुरुक्षेत्र की युद्धभूमि में दुर्योधन, भीष्म पितामह से बात करते हुए पाण्डव सेना की ओर संकेत कर रहा है। पृष्ठभूमि में विशाल सेना और भीम दिखाई देते हैं।

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