शीर्षक: नन्हें तारे विधा: बाल कविता लेखिका: शीला कौल
बच्चों की दुनिया सवालों से भरी होती है। आकाश में चमकते तारों को देखकर हर बच्चे के मन में कभी न कभी ऐसे ही प्रश्न उठते हैं। वरिष्ठ शिक्षिका एवं लेखिका शीला कौल की यह सरल और स्नेहपूर्ण बाल कविता उसी जिज्ञासा को स्वर देती है।
*** नन्हे तारे ***
ओ ! नन्हे – मुन्ने तारे
नन्हे – मुन्ने तारे ।
आँख मूंद शर्माते हो,
मंद – मंद मुस्काते हो ।
दिन – भर क्या तुम करते हो ?
और कहाँ तुम रहते हो ?
क्यों दिन में छुप जाते हो ?
क्या सूरज से डरते हो ?
क्यों फिरते हो रातों में ?
खेतों में , खलिहानों में ,
कहीं करते हो जंगल पार,
कहीं ताल, कहीं सागर पार ।
क्यों रहते हो बीच आकाश
आ जाओ तुम मेरे पास ।
साथ – साथ हम खेलेंगें,
नाचेंगें और गाऐंगें ,
हम – तुम अपने मित्रों संग,
जियेंगे जीवन के रंग ।
पढ़ेंगें और बढेंगें,
जीवन सुन्दर बनाऐंगें

