नवदुर्गा दर्शन

माँ सिद्धिदात्री की कथा में वर्णित नवदुर्गा का नौवाँ स्वरूप, कमल पर विराजमान चार भुजाओं वाली भगवती, हाथों में शंख, चक्र, गदा और कमल, समीप सिंह और दिव्य आभामंडल।
Blog, नवदुर्गा दर्शन, हिन्दी

नवरात्रि विशेष – 9

माँ सिद्धिदात्री की कथा में जानिए स्वयंभुव मनु को मिला वरदान, भगवान श्रीकृष्ण द्वारा भगवती की स्तुति, ब्रह्मा-विष्णु-महेश को प्राप्त दिव्य शक्तियाँ और भगवान शिव के अर्धनारीश्वर स्वरूप का पौराणिक प्रसंग। नवदुर्गा के नौवें स्वरूप की महिमा, मूल संस्कृत श्लोकों और शास्त्रीय संदर्भों सहित।

माँ महागौरी की कथा में वर्णित भगवती का दिव्य स्वरूप, श्वेत वस्त्रों और आभूषणों से सुसज्जित माँ महागौरी, समीप श्वेत वृषभ तथा हिमालय की पृष्ठभूमि।
Blog, नवदुर्गा दर्शन, हिन्दी

नवरात्रि विशेष – 8

माँ महागौरी की कथा में जानिए पार्वती की कठोर तपस्या, कौशिकी का दिव्य प्राकट्य, भगवान शिव के ‘काली’ सम्बोधन का रहस्य और उस हिंसक व्याघ्र की कथा, जिसे माता की कृपा से सोमनन्दी बनकर शिवगणों में स्थान मिला। शिवपुराण, वामनपुराण और अन्य शास्त्रों के प्रमाणों सहित।

नवरात्रि के सातवें स्वरूप माँ कालरात्रि का दिव्य चित्र। कृष्णवर्णा, चार भुजाओं वाली भगवती गर्दभ पर विराजमान हैं। चित्र पर ‘नवरात्रि विशेष – सातवाँ दर्शन: कालरात्रि’ तथा TheWhyLens की ब्रांडिंग अंकित है।
Blog, नवदुर्गा दर्शन, हिन्दी

नवरात्रि विशेष – 7

नवरात्रि के सातवें दर्शन में जानिए माँ कालरात्रि के प्राकट्य की अनेक शास्त्रीय कथाएँ, रुरु असुर का संहार, काली–कौशिकी–चामुण्डा का संबंध और महाकाली का दिव्य स्वरूप। साथ ही महाभागवत उपपुराण की वह विलक्षण कथा, जिसमें भगवती काली श्रीकृष्ण और भगवान शिव श्रीराधा के रूप में अवतरित होते हैं।

माँ कात्यायनी का दिव्य बहुभुजा स्वरूप, सिंहवाहन और चरणों के नीचे महिषासुर। पृष्ठभूमि में भगवान शिव, महर्षि कात्यायन तथा माँ उग्रचण्डा, भद्रकाली और कात्यायनी के तीन स्वरूप दर्शाए गए हैं।
Blog, नवदुर्गा दर्शन, हिन्दी

नवरात्रि विशेष – 6

महिषासुर का तीन सृष्टियों में जन्म और तीन बार संहार क्यों हुआ? भगवान शिव का अंश होने के बावजूद उसे देवी के हाथों मृत्यु क्यों मिली? और अंततः माँ कात्यायनी ने उसे अपने चरणों में स्थान क्यों दिया? जानिए कालिकापुराण, वामनपुराण और स्कन्दपुराण के शास्त्रीय प्रमाणों के साथ।

चार भुजाओं वाली माँ स्कन्दमाता की गोद में छह मुखों वाले भगवान कार्तिकेय, दोनों हाथों में कमल, आशीर्वाद मुद्रा और समीप विराजमान सिंह।
Blog, नवदुर्गा दर्शन, हिन्दी

नवरात्रि विशेष – 5

माँ स्कन्दमाता केवल भगवान कार्तिकेय की जननी ही नहीं, बल्कि उन्हें दिव्य अनुग्रह और ज्ञान प्रदान करने वाली परमेश्वरी भी हैं। शिवपुराण, स्कन्दपुराण, देवीभागवत और तमिल कन्दपुराणम् के प्रमाणों से जानिए भगवती के पाँचवें स्वरूप की महिमा।

सिंह पर विराजमान माँ चन्द्रघंटा का दिव्य दशभुजा स्वरूप, मस्तक पर अर्धचन्द्र, हाथों में विभिन्न आयुध, लाल वस्त्र और स्वर्ण मुकुट। पृष्ठभूमि में हिमालय तथा नवरात्रि विशेष का शीर्षक।
Blog, नवदुर्गा दर्शन, हिन्दी

नवरात्रि विशेष – 3

नवदुर्गा के तीसरे स्वरूप माँ चंद्रघंटा का प्राकट्य किन परिस्थितियों में हुआ? शिव-विवाह की बारात और जतुकासुर-वध से जुड़ी दो प्रचलित कथाओं के साथ जानिए भगवती का दशभुजा स्वरूप, मस्तक पर अर्धचंद्र, घंटानाद का महत्त्व तथा देवीकवच और दुर्गा सप्तशती में उपलब्ध शास्त्रीय प्रमाण।

सिंह पर विराजमान अष्टभुजाधारी माँ कूष्माण्डा, आठ हाथों में कमण्डलु, धनुष, बाण, कमल, सुधाकलश, चक्र, गदा और जपमाला धारण किए हुए। पीछे सूर्य का दिव्य तेज तथा ब्रह्माण्ड, ग्रह और आकाशगंगाएँ दिखाई दे रही हैं।
Blog, नवदुर्गा दर्शन, हिन्दी

नवरात्रि विशेष -4

जिस भगवती ने शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी और चन्द्रघण्टा के रूप में दर्शन दिए, वही माँ कूष्माण्डा सम्पूर्ण सृष्टि की जननी हैं। कालिकापुराण, देवीभागवत और दुर्गासप्तशती के आधार पर जानिए माँ का जगज्जननी स्वरूप, सूर्य से संबंध, अष्टभुजा रूप और पौराणिक प्रसंग।

हिमालय की पृष्ठभूमि में अक्षमाला और कमण्डलु धारण किए माँ ब्रह्मचारिणी का तपस्विनी स्वरूप
Blog, नवदुर्गा दर्शन, हिन्दी

नवरात्रि विशेष -2

नवदुर्गा का दूसरा स्वरूप माँ ब्रह्मचारिणी वास्तव में पार्वती का तपस्विनी स्वरूप है। शिवमहापुराण, स्कन्दपुराण और देवीपुराण के आधार पर जानिए उनकी कठोर तपस्या, अपर्णा और उमा नाम की कथा, सप्तर्षियों द्वारा ली गई परीक्षा और अंततः शिव-प्राप्ति का पूरा प्रसंग।

नवरात्रि विशेष में माँ शैलपुत्री का दिव्य स्वरूप, वृषभ पर आरूढ़, हाथों में त्रिशूल और कमल तथा अभय और वरद मुद्रा के साथ।
Blog, नवदुर्गा दर्शन, हिन्दी

नवरात्रि विशेष – 1

नवरात्रि की प्रथम देवी माँ शैलपुत्री कौन हैं? शास्त्रों के अनुसार वही महामाया पूर्व में सती, फिर योगनिद्रा से जुड़ी शक्ति और अंततः हिमालय-पुत्री पार्वती के रूप में प्रकट होती हैं। जानिए उनके प्राकट्य, नाम, स्वरूप और देवकार्य का शास्त्रीय आधार।

error: Content is protected !!
Scroll to Top